प्रिय पाठक गन आप इस दुर्गा चालीसा का पाठ नवरात्रि के अलावा हर दिन इसका पाठ कर सकते हैं | आज के इस पोस्ट में हम आपके लिए है दुर्गा चालीसा लिरिक्स इन हिंदी ( Durga Chalisa Lyrics in Hindi ) जिसे आप पीडीऍफ़ (PDF) के रूप में डाऊनलोड भी कर सकते है फिर आप हमारे इस से ऑनलाइन पढ़ सकते हैं |
Durga Chalisa Lyrics in Hindi
दुर्गा चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी |
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी
||निरंकार है ज्योति तुम्हारी |
तिहुं लोक फैली उजियारी ||शशि ललाट मुख महाविशाला |
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ||रूप मातु को अधिक सुहावे |
दरश करत जन अति सुख पावे | |
तुम संसार शक्ति लै कीना |
पालन हेतु अन्न धन दीना ||अन्नपूर्णा हुई जग पाला |
तुम ही आदि सुंदरी बाला ||प्रलयकाल सब नाशन हारी |
तूम गौरी शिवशंकर प्यारी ||शिव योगी तुम्हारे गुण गावें |
ब्रम्हा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ||रूप सरस्वती को तुम धारा |
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ||धरयो रूप नरसिंह को अम्बा |
परगट भई फाड़कर खम्बा ||रक्षा करि प्रह्ललाद बचायो |
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ||लक्ष्मी रूप धरो माहीं |
श्री नारायण अंग समाहीं ||क्षीरसिन्धु में करत विलासा |
दयासिन्धु दीजै मन आसा ||हिंगलाज में तुम्हीं भवानी |
महिमा अमित न जात बखानी ||मातंगी अरु धूमावती माता |
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ||श्री भैरव तारा जग तारिणी |
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ||केहरि वाहन सोह भवानी |
लांगुर वीर चलत अगवानी ||कर में खप्पर खड्ग विराजै |
जाको देख काल डर भाजै ||सोहै अस्त्र और त्रिशूला |
जाते उठत शत्रु हिय शुक्ला ||नगरकोट में तुम्हीं विराजत |
तिहुंलोक में डंका बाजत ||शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे |
रक्तबीज शंखन संहारे ||महिषासुर नृप अति अभिमानी |
जेहि अघ भार महि अकुलानी ||रूप कराल कालिका धारा |
सेन सहित तुम तिहि संहारा ||परी गाड़ संतन पर जब जब |
भई सहाय मातु तुम तब तब ||अमरपुरी अरु बासव लोका |
तब महिमा सब रहें अशोका ||ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी |
तुम्हें सदा पूजें नर- नारी ||प्रेम भक्ति से जो यश गावें |
दुःख दारिद्र निकट नहीं आवें ||ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाइ |
जन्म – मरण ताकौ छुटि जाई ||जोगी सुर मुनि कहत पुकारी |
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ||शंकर आचरज तप कीनो |
काम अरु क्रोध जीती सब लीनो ||निशिदिन ध्यान धरो शंकर को |
काहू काल नहीं सुमिरो तुमको ||शक्ति रूप का मरम न पायो |
शक्ति गई तब मन पछितायो ||शरणागत हुई कीर्ति बखानी |
जय जय जय जगदम्ब भवानी ||भई प्रसन्न आदि जगदम्बा |
दे शक्ति नहीं किन विलम्बामोको मातु कष्ट अति घेरो |
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ||आशा तृष्णा निपट सतावें |
रिपु मूरख मोहि डरपावे ||शत्रु नाश कीजै महारानी |
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ||करो कृपा हे मातु दयाला |
रिद्धि सिद्धि दे करहु निहाला ||जब लगी जिऊ दया फल पाऊं |
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ||दुर्गा चालीसा जो कोई गावै |
सब सुख भोग परम पद पावै ||देवीदास शरण निज जानी |
करहु कृपा जगदम्ब भवानी |||| इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ||
आरती करने के बाद यह मन्त्र जरूर पढ़े
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्र हरम |
सदा वसंतम हृदयारबिन्दे भवं भवानी सहितं नमामि ||
त्वमेव माता च पिता त्वमेव , त्वमेव बंधू सखा त्वमेव |
त्वमेव विद्या द्रविणम त्वमेव, त्वमेव सर्व मम देव देव ||
प्रदक्षिणा मंत्र
यानि कानि च पापानि जनमांतर कृतानि च |
तानी सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणा पदे – पदे ||