संकटमोचन हनुमान अष्टक का सम्पूर्ण पाठ दर्शाता हुआ भगवान हनुमान का दिव्य और तेजस्वी ब्लॉग पोस्टर

यदि आपके जीवन में बार बार संकट, भय मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाई, शत्रु बाधा, या फिर आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है, तो संकटमोचन हनुमान अष्टक का श्रद्धापूर्वक पाठ अत्यंत फलदायी है.

गोस्वामी सही तुलसीदास जी द्वारा रचित यह दिव्य स्त्रोत भगवन हनुमान की उन महान लीलाओं का करता है जिनमे उन्होंने देवताओं, श्रीराम, माता सीता और समस्त संसार के संकटो किया है.

आज भी करोडों भक्त इस अष्टक का पाठ कर के शान्ति, साहस और भगवन श्री राम की कृपा प्राप्त करते हैं.

                               

Sankat Mochan Hanuman Ashtak

बाल समय रवि भक्ष लियो तब तिनहु लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सो त्रास भयो जग को, यह  संकट काहु सो जात न टारो ।
देवन आन करी बिनति तब, छाड़ि  दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।

बालि की त्रास कपिस बसें गिरि, जात महाप्रभु पंथ निवारो।
चौकिन महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक नीवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।

अंगद के संग लेन  गए सिय, खोज कपिस यह बैन उचारो।
जीवत न   बचिहों हम सो जू, बिना सुधि लाये  इहां पगु धारो।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब,  सिया सुधि प्राण उबारो।
को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।

रावनत्रास दई  सिय को सब, राक्षसी  सों कही सोक  निवारो,
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए  महा रजनीचर मारो ।
चाहत सिय असोक सों  आगि सु, दै  प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में, कपि संकटमोचन नाम तिहारो।

बाण लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावन मारो।
लै गृह बैध सुषेन  समेत , तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दिए  तब, लछिमन के तुम प्राण उबारो।
को नहीं जानत है कपि संकट मोचन नाम तिहारो। 

रावन जुध  अजान कियो तब, नाग की फांस  सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ सहित सबै दल, मोह भयो या संकट भारो।
आनि खगेस तबै हनुमान जु , बंधन काटि सुत्रास  निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो।

बन्धु समेत  जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो।
देबिन्हिं  पूजि भली विधि सो बलि , देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।
जाये सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य  समेत  संहारों।
को नहीं जानत है जग में, कपि संकट मोचन नाम तिहारो,

काज किये बड़  देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहीं जात है टारो।
बेगि  हरो हनुमान महाप्रभु, जो कच्छु संकट होए हमारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

   दोहा

लाल देह लाली लसे, अरु धरी  लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।
जय श्री राम, जय जय हनुमान

संकटमोचन हनुमान अष्टक PDF यहां से डाऊनलोड करे

Hanuman Ashtak